नजारों में कहीं तो वो, नशीली -सी नजर होगी,
मुझे तुम ढूँढने तो दो,कहीं तो हमसफ़र होगी,
वहाँ कुछ बुलबुलें अपने ,सुरीले स्वर सुनाती हैं ,
वहाँ कुछ तितलियाँ उड़कर, छिटकती ,फुरफुरातीं हैं,
वहाँ कुछ फूल खिलते हैं ,वहाँ कलियाँ चटखती हैं,
हवायें जब गुजरतीं हैं ,नशे में थरथरातीं हैं ,
वहाँ घायल तमन्ना की,कँटीली -सी डगर होगी,
मुझे तुम ढूँढने तो दो,उसे मेरी खबर होगी ,
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