geeton ke badal-[5]
रविवार, 2 जनवरी 2011
राग कुछ ऐसे छिड़े हैं ,
तार कुछ ऐसे सजे हैं ,
प्यार के कितने संदेशे ,
रोज तेरे आ रहे हैं ,
रोशनी की वर्तिका है ,
पुष्प - गुछम सुष्मिता है ,
आर्द मन के रेशे -रेशे ,
पास तेरे जा रहे हैं ,
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें