geeton ke badal-[5]
मंगलवार, 18 जनवरी 2011
खींचती है हर लहर क्यों,
इस तरह मुझको यहाँ पर,
जिन्दगी ,अभियान जैसे ,
सिर्फ तेरा हो गई है,
एक धड़कन वक्ष में जो,
सिर्फ तेरे ही लिए है,
वो हरेक तूफ़ान से ,
आगे निकल कर हो गई है,
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