geeton ke badal-[5]
गुरुवार, 6 जनवरी 2011
गुनगुनी -सी धूप निकली ,
शीत में ठिठुरी हुई -सी ,
कोहरे की शाल में वो ,
प्यार से लिपटी हुई -सी,
क्या उसे इतना पता है ,
लोग कितने खुश हुए हैं ,
आ रही है वो यहाँ पर ,
लाज में सिमटी हुई -सी ,
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें