geeton ke badal-[5]
बुधवार, 26 जनवरी 2011
न पूछो अब किसी से ये ,कहाँ दिन -रात मिलते हैं ,
उसी की शोखियों में वो ,सुबह से शाम घुलते हैं,
उसी की धूप होती है, उसी की छाँव होती है,
उसी से वक्त रुकता है ,उसी से वक्त चलता है,
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